जैंसा चाहते हो वेंसा बनना सीखो !

हम सभी ने बचपन से लेकर आजतक अपने माता-पिता, परिवार वालों तथा दोस्तों से बहुत कुछ सीखा
और इन सब के अलावा स्कूल और कॉलेजों में कई सिद्धांतो, गणनाओं तथा क्रियाओं के अतिरिक्त
सांस्कृतिक, राजनीतिक एवं ऐतिहासिक जानकारियों के साथ-साथ बहुत कुछ पढ़ा, समझा और सीखा ।
टीवी, कंप्यूटर, व अन्य उपकरणों के द्वारा; अपनी ग़लतियों तथा विविध परिणामों के प्रभाव से  बहुत
कुछ सीखा ऐसे सीखते भूलते हम ऐसी स्थति में पहुँच जाते हैं की हमें पता चलता है की जिंदगी में कुछ ऐसे हुनर हमें
विकसित करने होते हैं जिनके द्वारा हम दुनिया मैं कुछ ऐसा करें जिससे हम अपनी मूलभूत आवश्यकतायों को पूरा कर सकें ।   इसके लिए कुछ ऐसा करना और बनना होता है, जिससे हमें तथा हमसे जुड़ें लोगों को  आवश्यक संसाधन तथा समस्यायों के समाधान
मिल सकें ।  हम जानते हैं की हम सभी इंसानों को अपनी छोटी बड़ी ज़रूरतें पूरी करने के लिए एक दूसरे की सहायता लेनी पड़ती  है और एक दूसरे के लिए कुछ ना कुछ करना हमारा कर्तव्य भी होता है और ज़िम्मेदारी भी और इसी
तरह एक दूसरे का साथ निभाने से ही हमारी जिंदगी खुशहाल बनती है।

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खुशियाँ उन्हीं को मिलती हैं जो किसी की खुशी का कारण बनते हैं।

हम सब की जिंदगी में एक ऐसी स्थिति आती है जब हम सोचते हैं, यार! मैं कुछ ऐसा करूँ जिससे मेरे माता-पिता का सिर गर्व से ऊँचा हो, और इसके लिए हम बहुत कुछ सोचते हैं ।

हम सभी अपनी अपनी फील्ड में सफल होने के लिए बहुत कुछ करते और सीखते हैं, फिरभी कुछ चीज़ें आदतें और क्रियाएँ ऐसी होती हैं, जिनमें से कुछ हम सही से कर नही पाते और कुछ को छोड़ नही पाते।  जीवन में किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए सबसे “IMPORTANT” , हैं वो है – आत्मविश्वाश, संयम, संतुलन तथा   दृढ़ निश्चय और संकल्प इनके अभाव में ना तो हम कुछ कर पाते हैं और ना ही कुछ विशेष बन ही पाते हैं,  यदि हम माहौल, प्रतिकूल परिस्थतियों एवं अन्य किसी भी कारणवश मूलभूत सिद्धांतो को ही न समझे,  तो फिर हमें  वो सब करना पड़ता है जो शायद  हमें पसंद न हो,  हममें से ज़्यादातर एक समय तक, और जो प्रयास करना ही छोड़ दें, वो कभी भी ये
सीख नही पाते जो की बहुत ज़रूरी होता है,
हालाँकि सबकी अपनी अपनी परिस्थिति और अलग अलग ख़्वाहिशें होती हैं जिसमें अनेकों धीरे-धीरे
और छोटे-छोटे प्रयासों और सही दृष्टिकोण के द्वारा सफल  हो जाते हैं, पर एक समय वो होता है जब हम बड़े ही “CONFUSE”  होते हैं और शुरुआत में सोचते  हैं .क्या मैं कर सकता हूँ !

यदि बहुत ज़्यादा सोचने पर भी अगर अंदर से ये आवाज़ आए की मैं ये नही कर सकता!
तो कोई बात नही हो सकता की आप किसी और बड़े काम को भी कर सकते हो लेकिन
अपने आप को तैयार करने के लिए तुम्हें कुछ आवश्यक समय और उचित चुनाव तथा सही मार्गदर्शन और जानकारी की
आवश्कता हो, आपको अपने जीवन में क्या करना और सीखना चाहिए ये आपको आपसे
बेहतर कोई और नही समझा सकता, हाँ आप अपनी और दूसरों की ग़लतियों से सीखकर तथा विभिन्न रास्तों में से जो आपको सबसे उत्तम लगे उस पर चलना होगा और सतत् निरंतर प्रयासों के बल पर बाधाओं को पार करते हुए आगे तक पहुँचना होता है, व जैंसा आज तक किसी ने नही किया या जो  भी आप सामान्य से हटकर कुछ अच्छा कर सको तो  करना, ये आप पर निर्भर है..

जो भी करना या बनना चाहो उसके लिए खुद पर विश्वाश दिल में उमंग, जोश और उत्साह होना  चाहिए ।

किसी अच्छे, नेक और  बड़े काम का “IDEA” आए  तो उसे अपने भीतर ही दफ़न मत करो कि  मैं ये नही कर पाऊँगा।  क्योंकि ऐसा सोचने से हम वो वास्तव में नही कर पाते जो हम  कर सकते थे! फिर समय ख़त्म हो जाने पर हम पश्चाताप के अलावा और कुछ नही कर सकते, हिम्मत और हौसले से काम न लेने पर बहुत कुछ सपना बनकर रह जाता है, चाहे वो ऐसो-आराम की जिंदगी हो या कुछ और इसीलिए आप जो चाहते हैं, उसे
पूरा करने से कभी मत चुकिए।

जो भी आपका दिल करना चाहे या जो भी आप सोच सको जैंसे- मंच पर भाषण देना, नाचना तथा अच्छे से गा पाना या फिर विज्ञान तथा तकनीकी क्षेत्र में या जो भी आप कर सको करो ।

 “Do try again one more time and finally you will be achieve your Goal, if you believe on our self”.  

जो भी आप चाहो सबकुछ कर सकते हो और  आप चाहो वेंसा
बन सकते हो, बस अपने दिमाग़ और बॉडी का सही इस्तेमाल यदि आप कर सको तो कुछ भी असंभव नही है । सब हमें सीखना होता है, अब  अपनी आँखे बंद करके अंदर ये सोचो मुझे बहुत जल्द अपने लक्ष्य के लिए तैयार होना है –“WITHOUT SHORTCUT” और उसके लिए मुझे खुद में कुशल रणनीति के प्रमुख पहलू और
आवश्यक गुणों का विकास करना ही  है। 

 

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